चीन आखिर किसी धर्म को क्यों नहीं मानता, क्यों है नास्तिक? Nastik population in china
चीन आखिर किसी धर्म को क्यों नहीं मानता, क्यों है नास्तिक?
Nastik population in china
सरकार का मानना है कि धार्मिक आस्था वामपंथ को कमज़ोर करती है. चीन के पहले कम्युनिस्ट नेता माओत्से तुंग ने ही धर्म को नष्ट करने की कोशिश की थी. उन्होंने नास्तिकवाद को बढ़ावा दिया था.
चीन आधिकारिक तौर पर एक नास्तिक देश है हालांकि पिछले 40 सालों में यहां धार्मिक गतिविधियां बढ़ी हैं. चीन का संविधान वैसे तो किसी भी धर्म का पालन करने की आजादी देता है लेकिन इसके बावजूद चीन में धर्म के रास्ते में कई पाबंदियां हैं.चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद भी बौद्ध धर्म को सरकार ने बढ़ावा दिया. शी जिनपिंग ने सार्वजनिक तौर पर बौद्ध, कन्फ्यूसियनिजम और दाओजिम से देश के नैतिक पतन पर नियंत्रण की बात कही थी.


‘विश्व विजेयता सन्त’’(संत रामपाल जी महाराज की अध्यक्षता में हिन्दुस्तान विश्व धर्मगुरुके रूप में प्रतिष्ठित होगा)”संत रामपाल जी के विषय में ’’नास्त्रोदमस‘‘ की भविष्यवाणी“फ्रैंच (फ्रांस) देश के नास्त्रोदमस नामक प्रसिद्ध भविष्यवक्ता ने सन् (इ.स.)1555 में एक हजार श्लोकों में भविष्य की सांकेतिक सत्य भविष्यवाणियां लिखी हैं।सौ-सौ श्लोकों के दस शतक बनाए हैं। जिनमें से अब तक सर्व सिद्ध हो चुकी हैं।हिन्दुस्तान में सत्य हो चुकी भविष्यवाणियों में से :-1ण् भारत की प्रथम महिला प्रधानमन्त्रा बहुत प्रभावशाली व कुशल होगी (यहसंकेत स्व. श्रीमती इन्दिरा गांधी की ओर है) तथा उनकी मृत्यु निकटतम रक्षकद्वारा होना लिखा था, जो सत्य हुई।2ण् उसके पश्चात् उन्हीं का पुत्रा उनका उत्तराधिकारी होगा और वह बहुत कमसमय तक राज्य करेगा तथा आकस्मिक मृत्यु को प्राप्त होगा, जो सत्य सिद्ध हुई।(पूर्व प्रधानमन्त्रा स्व. श्री राजीव गांधी जी के विषय में)।3ण् संत रामपाल जी महाराज के विषय में भविष्यवाणी नास्त्रोदमस द्वारा जोविस्तार पूर्वक लिखी हैं।(क) अपनी भविष्यवाणी के शतक पांच के अंत में तथा शतक छः के प्रारम्भ मेंनास्त्रोदमस जी ने लिखा है

कि आज अर्थात् इ.स. (सन्) 1555 से ठीक 450 वर्षपश्चात् अर्थात् सन् 2006 में एक हिन्दू संत (शायरन) प्रकट होगा अर्थात् सर्व जगतमें उसकी चर्चा होगी। उस समय उस हिन्दू धार्मिक संत (शायरन) की आयु 50व 60 वर्ष के बीच होगी। परमेश्वर ने नास्त्रोदमस को संत रामपाल जी महाराज केअधेड़ उम्र वाले शरीर का साक्षात्कार करवा कर चलचित्रा की भांति सारी घटनाओंको दिखाया और समझाया। श्री नास्त्रोदमस जी ने 16 वीं सदी को प्रथम शतककहा है इस प्रकार पांचवां शतक 20 वीं सदी हुआ। नास्त्रोदमस जी ने कहा है किवह धार्मिक हिन्दू नेता अर्थात् संत (ब्भ्ल्त्म्छ.शायरन) पांचवें शतक के अंत केवर्ष में अर्थात् सन् (ई.सं.) 1999 में घर-घर सत्संग करना त्याग कर अर्थात् चौखटोंको लांघ कर बाहर आयेगा तथा अपने अनुयाइयों को शास्त्राविधि अनुसार भक्तिमार्गबताएगा। उस महान संत के बताए मार्ग से अनुयाइयों को अद्वितीय आध्यात्मिकऔर भौतिक लाभ होगा। उस तत्वदृष्टा हिन्दू संत के द्वारा बताए शास्त्राप्रमाणिततत्वज्ञान को समझ कर परमात्मा चाहने वाले श्रद्धालु ऐसे अचंभित होगें जैसे कोईगहरी नींद से जागा हो। उस तत्वदृष्टा हिन्दू संत द्वारा सन् 1999 में चलाईआध्यात्मिक क्रांति इ.स. 2006 तक चलेगी। तब तक बहु संख्या में परमात्मा चाहनेवाले भक्त तत्व ज्ञान समझ कर अनुयायी बन कर सुखी हो चुके होंगे। उसकेपश्चात् उस स्थान की चौखट से भी बाहर लांघेगा। उसके पश्चात् 2006 से स्वर्णयुग का प्रारम्भ होगा।

नोटः प्रिय पाठकजन कृप्या पढ़ें निम्न भविष्यवाणी जो फ्रांस देश के वासी श्रीनास्त्रोदमस ने की थी। जिस के विषय में मद्रास के एक ज्योतिशास्त्रा के. एस�कृष्णमूर्ति ने कहा है कि श्री नास्त्रोदमस जी द्वारा सन् 1555 में लिखी भविष्यवाणियोंका यथार्थ अनुवाद “सन् 1998 में महाराष्ट्र में एक ज्योतिष शास्त्रा करेगा। वहज्योतिष शास्त्रा नास्त्रोदमस की भविष्यवाणियों का सांकेतिक भाषा का स्पष्टीकरणकर उसमें लिखित भविष्य घटनाओं का अर्थ देकर अपना भविष्य गं्रथ प्रकाशितकरेगा।” उसी ज्योतिषशास्त्रा द्वारा यथार्थ अनुवादित की गई पुस्तक से अनुवादकर्ताके शब्दों में पढ़ें।1ण् (पृष्ठ 32ए 33 पर) :-- ठहरो स्वर्ण युग (रामराज्य) आ रहा है। एक अधेड़उम्र का औदार्य (उदार) अजोड़ महासत्ता अधिकारी भारत ही नहीं सारी पृथ्वी परस्वर्ण युग लाएगा और अपने सनातन धर्म का पुनरूत्थान करके यथार्थ भक्ति मार्गबताकर सर्वश्रेष्ठ हिन्दू राष्ट्र बनाएगा। तत्पश्चात् ब्रह्मदेश पाकिस्तान, बांगला,श्रीलंका, नेपाल, तिब्बत (तिबेत), अफगानिस्तान, मलाया आदि देशों में वहीसार्वभौम धार्मिक नेता होगा। सत्ताधारी चांडाल चौकडि़यों पर उसकी सत्ता होगी वहनेता (शायरन) दुनिया को अधाप मालूम होना है, बस देखते रहो।2ण् (पृष्ठ 40 पर फिर लिखा है) :-- ठहरो रामराज्य (स्वर्ण युग) आ रहा है। जूनइ.स. 1999 से इ.स. 2006 तक चलने वाली उत्क्रांति में स्वर्णयुग का उत्थान होगा।
हिन्दुस्तान में उदयन होने वाला तारणहार शायरन दुनिया में सुख समृद्धि व शान्तिप्रदान करेगा। नास्त्रोदमस जी ने निःसंदेह कहा है कि प्रकट होने वाला शायरन(ब्भ्ल्त्म्छ) अभी ज्ञात नहीं है लेकिन वह क्रिश्चन अथवा मुस्लमान हरगिज नहींहै। वह हिन्दू ही होगा और मैं नास्त्रोदमस उसका अभी छाती ठोक कर गर्व करताहूं क्योंकि उस दिव्य स्वतंत्रा सूर्य शायरन का उदय होते ही सारे पहले वाले विद्वानकहलाने वाले महान नेताओं को निष्प्रभ होकर उसके सामने नम्र बनना पडे़गा।
वहहिन्दुस्तानी महान तत्वदृष्टा संत सभी को अभूतपूर्व राज्य प्रदान करेगा। वह समानकायदा, समान नियम बनाएगा, स्त्रा-पुरुष में, अमीर-गरीब में, जाति और धर्म मेंकोई भेद-भाव नहीं रखेगा, किसी पर अन्याय नहीं होने देगा। उस तत्व दर्शी संतका सर्व जनता विशेष सम्मान करेगी। माता-पिता तो आदरणीय होते ही हैं परन्तुअध्यात्मिकता व पवित्राता के आधार पर उस शायरन (तत्वदर्शी संत) कामाता-पिता से भी अलग श्रद्धा स्थान होगा। नास्त्रोदमस स्वयं ज्यू वंश का था तथाफ्रांस देश का नागरिक था। उसने क्रिश्चन धर्म स्वीकार कर रखा था, फिर भीनास्त्रोदमस ने निःसंदेह कहा है कि प्रगट होने वाला शायरन केवल हिन्दू ही होगा।3ण् (पृष्ठ 41 पर) :-- सभी को समान कायदा, नियम, अनुशासन पालन करवाकर सत्य पथ पर लाएगा। मैं (नास्त्रोदमस) एक बात निर्विवाद सिद्ध करता हूं वहशायरन (धार्मिक नेता) नया ज्ञान आविष्कार करेगा। वह सत्य मार्ग दर्शन करवानेवाला तारणहार एशिया खण्ड में जिस देश के नाम महासागर (हिन्द महासागर)है। उसी नाम वाले (हिन्दुस्तान) देश में जन्म लेगा। वह ना क्रिश्चन, ना मुस्लमान,
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